इति वदत्सु दानवेषु वाचस्पतिरिदमभाषत यद्भग्नेषु
भवत्सु पूर्वमनिलेनैवाद्रिराकम्पितो यच्चापत्यकलत्रदर्शनकृते यूयं गता भूतलम् ।
यद्वा भोगिपतेः फणाग्रवहनं युष्माभिरेवार्थितं
सर्वं वेद स एष एव भवतामाचार्यपादः कविः ॥
इति वदत्सु दानवेषु वाचस्पतिरिदमभाषत यद्भग्नेषु
भवत्सु पूर्वमनिलेनैवाद्रिराकम्पितो यच्चापत्यकलत्रदर्शनकृते यूयं गता भूतलम् ।
यद्वा भोगिपतेः फणाग्रवहनं युष्माभिरेवार्थितं
सर्वं वेद स एष एव भवतामाचार्यपादः कविः ॥
भवत्सु पूर्वमनिलेनैवाद्रिराकम्पितो यच्चापत्यकलत्रदर्शनकृते यूयं गता भूतलम् ।
यद्वा भोगिपतेः फणाग्रवहनं युष्माभिरेवार्थितं
सर्वं वेद स एष एव भवतामाचार्यपादः कविः ॥
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ | २२ | २३ | २४ | २५ | २६ | २७ | २८ | २९ | ३० | ३१ | ३२ | ३३ | ३४ |
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| इ | ति | व | द | त्सु | दा | न | वे | षु | वा | च | स्प | ति | रि | द | म | भा | ष | त | य | द्भ | ग्ने | षु | |||||||||||
| भ | व | त्सु | पू | र्व | म | नि | ले | नै | वा | द्रि | रा | क | म्पि | तो | य | च्चा | प | त्य | क | ल | त्र | द | र्श | न | कृ | ते | यू | यं | ग | ता | भू | त | लम् |
| य | द्वा | भो | गि | प | तेः | फ | णा | ग्र | व | ह | नं | यु | ष्मा | भि | रे | वा | र्थि | तं | |||||||||||||||
| स | र्वं | वे | द | स | ए | ष | ए | व | भ | व | ता | मा | चा | र्य | पा | दः | क | विः | |||||||||||||||
| म | स | ज | स | त | त | ग | |||||||||||||||||||||||||||
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