विस्तारः
अस्मिन् श्लोके कविनीलकण्ठः स्वेष्टदेवतामर्धनारीश्वरं स्तौति । वन्द इत्युक्ते कर्माकाङ्क्षापूरकं पदं किम् ? तद्वक्तुं न शक्यते । दंपतिमित्युक्ते अप शब्द । दंपती इत्युक्ते व्यक्त्यैक्यव्याघातः ॥
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | न्दे | वा | ञ्छि | त | ला | भा | य |
| क | र्म | किं | त | न्न | क | थ्य | ते |
| किं | दं | प | ति | मि | ति | ब्रू | या |
| मु | ता | हो | दं | प | ती | इ | ति |
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