अन्वयः
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आश्रावणायाम् युक्तायाम् दैत्याः नित्यशः तुष्यन्ति । च एव वक्त्रपाणौ कृते दानवाः नित्यम् तुष्यन्ति ।
Summary
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When the Ashravana is performed, the Daityas are always pleased. And likewise, when the Vaktrapani is done, the Danavas are always pleased.
पदच्छेदः
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| आश्रावणायाम् | आश्रावणा (७.१) | when the Ashravana |
| युक्तायाम् | युक्त (√युज्+क्त, ७.१) | is performed |
| दैत्याः | दैत्य (१.३) | the Daityas |
| तुष्यन्ति | तुष्यन्ति (√तुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are pleased |
| नित्यशः | नित्यशस् | always |
| वक्त्रपाणौ | वक्त्रपाणि (७.१) | when the Vaktrapani |
| कृते | कृत (√कृ+क्त, ७.१) | is done |
| च | च | and |
| एव | एव | also |
| नित्यम् | नित्यम् | always |
| तुष्यन्ति | तुष्यन्ति (√तुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are pleased |
| दानवाः | दानव (१.३) | the Danavas |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | श्रा | व | णा | यां | यु | क्ता | यां |
| दै | त्या | स्तु | ष्य | न्ति | नि | त्य | शः |
| व | क्त्र | पा | णौ | कृ | ते | चै | व |
| नि | त्यं | तु | ष्य | न्ति | दा | न | वाः |
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