अन्वयः
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(यत्र) हस्तपादाभ्याम् स्वस्तिकौ (भवतः), तत् दिक्स्वस्तिकम् उच्यते। (अलातककरणे) चरणम् अलातं कृत्वा दक्षिणं करम् व्यंसयेत्।
Summary
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...and the hands and feet are crossed, that is called 'Diksvastika'. (For the Alātaka karaṇa:) Having performed the Alāta movement with the foot, one should extend the right hand.
पदच्छेदः
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| स्वस्तिकौ | स्वस्तिक (१.२) | crossed |
| हस्तपादाभ्याम् | हस्त–पाद (३.२) | with hands and feet |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| दिक्स्वस्तिकम् | दिक्स्वस्तिक (१.१) | Diksvastika |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
| अलातं | अलात (२.१) | Alāta movement |
| चरणं | चरण (२.१) | foot |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having done |
| व्यंसयेत् | व्यंसयेत् (वि√अंस् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should extend |
| दक्षिणम् | दक्षिण (२.१) | right |
| करम् | कर (२.१) | hand |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | स्ति | कौ | ह | स्त | पा | दा | भ्यां |
| त | द्दि | क्ष्व | स्ति | क | मु | च्य | ते |
| अ | ला | तं | च | र | णं | कृ | त्वा |
| व्यं | स | ये | द्द | क्षि | णं | क | रम् |
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