अन्वयः
AI
त्रिभिः (मातृभिः) कलापकम् च एव (भवति)। चतुर्भिः (मातृभिः) षण्डकम् भवेत्। पञ्च करणानि एव स्युः (चेत् सः) सङ्घातकः इति स्मृतः।
Summary
AI
A sequence of three mātṛkās is a 'kalāpaka', and one of four is a 'ṣaṇḍaka'. A combination of five karaṇas is known as a 'saṅghātaka'.
पदच्छेदः
AI
| त्रिभिः | त्रि (३.३) | By three |
| कलापकम् | कलापक (१.१) | a kalāpaka |
| च | च | and |
| एव | एव | indeed |
| चतुर्भिः | चतुर् (३.३) | by four |
| षण्डकम् | षण्डक (१.१) | a ṣaṇḍaka |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| पञ्च | पञ्चन् (१.३) | five |
| एव | एव | just |
| करणानि | करण (१.३) | karaṇas |
| स्युः | स्युः (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | if there are |
| सङ्घातकः | सङ्घातक (१.१) | saṅghātaka |
| इति | इति | thus |
| स्मृतः | स्मृत (√स्मृ+क्त, १.१) | is remembered/called |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्रि | भिः | क | ला | प | कं | चै | व |
| च | तु | र्भिः | ष | ण्ड | कं | भ | वेत् |
| प | ञ्चै | व | क | र | णा | नि | स्युः |
| स | ङ्घा | त | क | इ | ति | स्मृ | तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.