अन्वयः
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तथा च एव परावृत्ते कटिच्छिन्नम् प्रयोजयेत् । पुनः स्वस्तिकम् करणम् कृत्वा करौ च व्यंसितौ (कार्यौ) ।
Summary
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In the Parāvṛtta, one should also employ the Kaṭīcchinna. After performing the Svastika karaṇa, the hands should again be dropped from the shoulders (Vyaṃsita).
पदच्छेदः
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| कटिच्छिन्नम् | कटी–छिन्न (√छिद्+क्त, २.१) | Kaṭīcchinna |
| तथा | तथा | also |
| च | च | and |
| एव | एव | indeed |
| परावृत्ते | परावृत्त (परा√वृत्+क्त, ७.१) | in the Parāvṛtta |
| प्रयोजयेत् | प्रयोजयेत् (प्र√युज् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should employ |
| स्वस्तिकम् | स्वस्तिक (२.१) | the Svastika |
| करणम् | करण (२.१) | karaṇa |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having performed |
| व्यंसितौ | व्यंसित (वि√अंस्+णिच्+क्त, १.२) | dropped from the shoulders |
| च | च | and |
| करौ | कर (१.२) | the two hands |
| पुनः | पुनर् | again |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | टि | च्छि | न्नं | त | था | चै | व |
| प | रा | वृ | त्ते | प्र | यो | ज | येत् |
| स्व | स्ति | कं | क | र | णं | कृ | त्वा |
| व्यं | सि | तौ | च | क | रौ | पु | नः |
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