अन्वयः
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ततः शान्तितोयम् दत्त्वा ततः सूत्रम् प्रसारयेत् । (भूमिम्) चतुःषष्टि करान् कृत्वा तान् पुनः च द्विधा कुर्यात् ।
Summary
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Then, after sprinkling consecrated water, one should stretch the cord. Having marked out sixty-four hands, one should then divide that area into two parts.
पदच्छेदः
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| शान्तितोयम् | शान्ति–तोय (२.१) | consecrated water |
| ततः | ततः | then |
| दत्त्वा | दत्त्वा (√दा+क्त्वा) | having given/sprinkled |
| ततः | ततः | then |
| सूत्रम् | सूत्र (२.१) | the cord |
| प्रसारयेत् | प्रसारयेत् (प्र√सृ +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should stretch |
| चतुष्षष्टिकरान् | चतुःषष्टि–कर (२.३) | sixty-four hands |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| द्विधा | द्विधा | in two parts |
| कुर्यात् | कुर्यात् (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should make |
| पुनः | पुनर् | again |
| च | च | and |
| तान् | तद् (२.३) | them |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शा | न्ति | तो | यं | त | तो | द | त्त्वा |
| त | तः | सू | त्रं | प्र | सा | र | येत् |
| च | तु | ष्ष | ष्टि | क | रा | न्कृ | त्वा |
| द्वि | धा | कु | र्या | त्पु | न | श्च | तान् |
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