अन्वयः
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तेषाम् दैत्यानाम् विप्रकारजम् व्यवसितम् दृष्ट्वा, सर्वैः सुतैः समन्वितः अहम् ब्रह्माणम् उपस्थितः (अस्मि)।
Summary
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Seeing the malicious resolve of those Daityas, I, accompanied by all my sons, approached Brahma.
पदच्छेदः
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| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| व्यवसितम् | व्यवसित (वि+अव√सो+क्त, २.१) | resolve |
| दैत्यानाम् | दैत्य (६.३) | of the Daityas |
| विप्रकारजम् | विप्रकार–ज (२.१) | born of malice |
| उपस्थितः | उपस्थित (उप√स्था+क्त, १.१) | approached |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| ब्रह्माणम् | ब्रह्मन् (२.१) | Brahma |
| सुतैः | सुत (३.३) | by sons |
| सर्वैः | सर्व (३.३) | by all |
| समन्वितः | समन्वित (सम्+अनु√इ+क्त, १.१) | accompanied |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ष्ट्वा | ते | षां | व्य | व | सि | तं |
| दै | त्या | नां | वि | प्र | का | र | ज |
| मु | प | स्थि | तो | ऽहं | ब्र | ह्मा | णं |
| सु | तैः | स | र्वैः | स | म | न्वि | तः |
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