अये ममोदासितमेव जिह्वया
द्वयेऽपि तस्मिन्ननतिप्रयोजने ।
गरौ गिरः पल्लवनार्थलाघवे
मितं च सारं च वचो हि वाग्मिता ॥
अये ममोदासितमेव जिह्वया
द्वयेऽपि तस्मिन्ननतिप्रयोजने ।
गरौ गिरः पल्लवनार्थलाघवे
मितं च सारं च वचो हि वाग्मिता ॥
द्वयेऽपि तस्मिन्ननतिप्रयोजने ।
गरौ गिरः पल्लवनार्थलाघवे
मितं च सारं च वचो हि वाग्मिता ॥
अन्वयः
AI
अये! अनतिप्रयोजने तस्मिन् द्वये अपि मम जिह्वया उदासितम् एव। हि गिरः पल्लवने गरौ (सति) अर्थलाघवे (च इष्टे सति) मितं सारं च वचः वाग्मिता (भवति)।
Summary
AI
"Oh! My tongue was indeed indifferent to those two matters (lineage and name) which are not very important. For, eloquence consists of speech that is concise and meaningful, especially when elaboration of words is burdensome and brevity of meaning is desired."
पदच्छेदः
AI
| अये | अये | Oh |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| उदासितम् | उदासित (उद्√आस्+क्त, १.१) | was indifferent |
| एव | एव | indeed |
| जिह्वया | जिह्वा (३.१) | tongue |
| द्वये | द्वय (७.१) | to the two matters |
| अपि | अपि | even |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that |
| अनतिप्रयोजने | न–अतिप्रयोजन (७.१) | which is not very important |
| गरौ | गुरु (७.१) | when burdensome |
| गिरः | गिर् (६.१) | of words |
| पल्लवनार्थलाघवे | पल्लवन–अर्थलाघव (७.१) | in elaboration and brevity of meaning |
| मितम् | मित (√मा+क्त, १.१) | concise |
| च | च | and |
| सारम् | सार (१.१) | meaningful |
| च | च | and |
| वचः | वचस् (१.१) | speech |
| हि | हि | for |
| वाग्मिता | वाग्मिता (१.१) | eloquence |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ये | म | मो | दा | सि | त | मे | व | जि | ह्व | या |
| द्व | ये | ऽपि | त | स्मि | न्न | न | ति | प्र | यो | ज | ने |
| ग | रौ | गि | रः | प | ल्ल | व | ना | र्थ | ला | घ | वे |
| मि | तं | च | सा | रं | च | व | चो | हि | वा | ग्मि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.