यदि स्वभावान्मम नोज्ज्वलं कुलं
ततस्तदुद्भावनमौचिती कुतः ।
अथावदातं तदहो विडम्बना
तथा कथा प्रेष्यतयोपसेदुषः ॥
यदि स्वभावान्मम नोज्ज्वलं कुलं
ततस्तदुद्भावनमौचिती कुतः ।
अथावदातं तदहो विडम्बना
तथा कथा प्रेष्यतयोपसेदुषः ॥
ततस्तदुद्भावनमौचिती कुतः ।
अथावदातं तदहो विडम्बना
तथा कथा प्रेष्यतयोपसेदुषः ॥
अन्वयः
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यदि मम कुलं स्वभावात् न उज्ज्वलम् (अस्ति), ततः तत्-उद्भावनम् औचिती कुतः? अथ तत् अवदातम् (अस्ति), (तर्हि) प्रेष्यतया उपसेदुषः (मम) तथा कथा अहो विडम्बना।
Summary
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"If my family is not naturally illustrious, then where is the propriety in revealing it? And if it is distinguished, alas, what a mockery it is to speak of it for one who has approached you as a messenger."
पदच्छेदः
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| यदि | यदि | If |
| स्वभावात् | स्वभाव (५.१) | by nature |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| न | न | not |
| उज्ज्वलम् | उज्ज्वल (१.१) | illustrious |
| कुलम् | कुल (१.१) | family |
| ततः | ततः | then |
| तदुद्भावनम् | तद्–उद्भावन (१.१) | its revelation |
| औचिती | औचिती (१.१) | propriety |
| कुतः | कुतः | where is |
| अथ | अथ | And if |
| अवदातम् | अवदात (१.१) | distinguished |
| तत् | तद् (१.१) | it |
| अहो | अहो | alas |
| विडम्बना | विडम्बना (१.१) | what a mockery |
| तथा | तथा | such |
| कथा | कथा (१.१) | talk |
| प्रेष्यतया | प्रेष्यता (३.१) | due to being a messenger |
| उपसेदुषः | उपसेदिवस् (उप√सद्+क्वसु, ६.१) | of one who has approached |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दि | स्व | भा | वा | न्म | म | नो | ज्ज्व | लं | कु | लं |
| त | त | स्त | दु | द्भा | व | न | मौ | चि | ती | कु | तः |
| अ | था | व | दा | तं | त | द | हो | वि | ड | म्ब | ना |
| त | था | क | था | प्रे | ष्य | त | यो | प | से | दु | षः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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