याचितश्चिरयति क्व नु धीरः
प्राणने क्षणमपि प्रतिभूः कः ।
शंसति द्विनयनी दृढनिद्रां
द्राङ्गिमेषमिषघूर्णनपूर्णा ॥
याचितश्चिरयति क्व नु धीरः
प्राणने क्षणमपि प्रतिभूः कः ।
शंसति द्विनयनी दृढनिद्रां
द्राङ्गिमेषमिषघूर्णनपूर्णा ॥
प्राणने क्षणमपि प्रतिभूः कः ।
शंसति द्विनयनी दृढनिद्रां
द्राङ्गिमेषमिषघूर्णनपूर्णा ॥
अन्वयः
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धीरः याचितः (सन्) क्व नु चिरयति? प्राणने क्षणम् अपि कः प्रतिभूः? निमेष-मिष-घूर्णन-पूर्णा द्विनयनी द्राक् दृढनिद्राम् शंसति ।
Summary
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Where indeed does a steadfast person delay when requested? Who is the guarantor for even a moment of life? The pair of eyes, rolling under the pretext of blinking, quickly indicates deep sleep (i.e., death).
पदच्छेदः
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| याचितः | याचित (√याच्+क्त, १.१) | When requested |
| चिरयति | चिरयति (√चिरय कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | delays |
| क्व | क्व | where |
| नु | नु | indeed |
| धीरः | धीर (१.१) | a steadfast person |
| प्राणने | प्राणन (७.१) | in living |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | for a moment |
| अपि | अपि | even |
| प्रतिभूः | प्रतिभू (१.१) | a guarantor |
| कः | किम् (१.१) | who |
| शंसति | शंसति (√शंस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | indicates |
| द्विनयनी | द्विनयनी (१.१) | the pair of eyes |
| दृढनिद्राम् | दृढ–निद्रा (२.१) | deep sleep (death) |
| द्राक् | द्राक् | quickly |
| निमेषमिषघूर्णनपूर्णा | निमेष–मिष–घूर्णन–पूर्णा (१.१) | full of rolling under the pretext of blinking |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | चि | त | श्चि | र | य | ति | क्व | नु | धी | रः |
| प्रा | ण | ने | क्ष | ण | म | पि | प्र | ति | भूः | कः |
| शं | स | ति | द्वि | न | य | नी | दृ | ढ | नि | द्रां |
| द्रा | ङ्गि | मे | ष | मि | ष | घू | र्ण | न | पू | र्णा |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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