स्मरहुताशनदीपितया तया
बहु मुहुः सरसं सरसीरुहम् ।
श्रयितुमर्धपथे कृतमन्तरा
श्वसितनिर्मितमर्मरमुज्झितम् ॥
स्मरहुताशनदीपितया तया
बहु मुहुः सरसं सरसीरुहम् ।
श्रयितुमर्धपथे कृतमन्तरा
श्वसितनिर्मितमर्मरमुज्झितम् ॥
बहु मुहुः सरसं सरसीरुहम् ।
श्रयितुमर्धपथे कृतमन्तरा
श्वसितनिर्मितमर्मरमुज्झितम् ॥
अन्वयः
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स्मरहुताशनदीपितया तया श्रयितुम् अर्धपथे कृतं सरसं सरसीरुहं बहु मुहुः अन्तरा श्वसितनिर्मितमर्मरम् (सत्) उज्झितम् ।
Summary
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Inflamed by the fire of love, she repeatedly tried to place a fresh lotus on her chest for relief. However, halfway there, she would abandon it, as the lotus, withered by her hot sighs, would make a dry, rustling sound.
पदच्छेदः
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| स्मरहुताशनदीपितया | स्मर–हुताशन–दीपित (३.१) | by her who was inflamed by the fire of love |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| बहु | बहु | many times |
| मुहुः | मुहुस् | again and again |
| सरसम् | सरस (२.१) | fresh |
| सरसीरुहम् | सरसीरुह (२.१) | lotus |
| श्रयितुम् | श्रयितुम् (√श्रि+तुमुन्) | to place/take refuge in |
| अर्धपथे | अर्धपथ (७.१) | halfway |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, २.१) | brought |
| अन्तरा | अन्तरा | in the middle |
| श्वसितनिर्मितमर्मरम् | श्वसित–निर्मित–मर्मर (२.१) | which made a rustling sound from her sighs |
| उज्झितम् | उज्झित (√उझ्झ्+क्त, २.१) | abandoned |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्म | र | हु | ता | श | न | दी | पि | त | या | त | या |
| ब | हु | मु | हुः | स | र | सं | स | र | सी | रु | हम् |
| श्र | यि | तु | म | र्ध | प | थे | कृ | त | म | न्त | रा |
| श्व | सि | त | नि | र्मि | त | म | र्म | र | मु | ज्झि | तम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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