कतिपयदिवसैर्वयस्यया वः
स्वयमभिलष्य वरिष्यते वरीयान् ।
क्रशिमशमनयानया तदाप्तुं
रुचिरुचिताथ भवद्विधाविधाभिः ॥
कतिपयदिवसैर्वयस्यया वः
स्वयमभिलष्य वरिष्यते वरीयान् ।
क्रशिमशमनयानया तदाप्तुं
रुचिरुचिताथ भवद्विधाविधाभिः ॥
स्वयमभिलष्य वरिष्यते वरीयान् ।
क्रशिमशमनयानया तदाप्तुं
रुचिरुचिताथ भवद्विधाविधाभिः ॥
अन्वयः
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कतिपयदिवसैः वः वयस्यया स्वयम् अभिलष्य वरीयान् वरिष्यते । अथ तदा क्रशिमशमनया अनया (वयस्यया) आप्तुम् भवद्विधाविधाभिः रुचिः उचिता ।
Summary
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"In a few days, a most excellent man will be chosen by your friend herself, according to her own desire. Therefore, it is fitting for you, her companions, to have the desire to help her alleviate her emaciation so she can attain him."
पदच्छेदः
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| कतिपयदिवसैः | कतिपयदिवस (३.३) | in a few days |
| वयस्यया | वयस्या (३.१) | by the friend |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
| स्वयम् | स्वयम् | herself |
| अभिलष्य | अभिलष्य (अभि√लष्+ल्यप्) | having desired |
| वरिष्यते | वरिष्यते (√वृ भावकर्मणोः लृट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | will be chosen |
| वरीयान् | वरीयस् (१.१) | a most excellent man |
| क्रशिमशमनया | क्रशिमशमन (३.१) | by alleviating the emaciation |
| अनया | इदम् (३.१) | by this (friend) |
| तदा | तदा | then |
| आप्तुम् | आप्तुम् (√आप्+तुमुन्) | to obtain |
| रुचिः | रुचि (१.१) | desire/interest |
| उचिता | उचित (√वच्+क्त, १.१) | is proper |
| अथ | अथ | therefore |
| भवद्विधाविधाभिः | भवद्विधाविधा (३.३) | by those of your kind |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ति | प | य | दि | व | सै | र्व | य | स्य | या | वः | |
| स्व | य | म | भि | ल | ष्य | व | रि | ष्य | ते | व | री | यान् |
| क्र | शि | म | श | म | न | या | न | या | त | दा | प्तुं | |
| रु | चि | रु | चि | ता | थ | भ | व | द्वि | धा | वि | धा | भिः |
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