व्यतरदथ पिताशिषं सुतायै
नतशिरसे सहसोन्नमय्य मौलिम् ।
दयितमभिमतं स्वयंवरे त्वं
गुणमयमाप्नुहि वासरैः कियद्भिः ॥
व्यतरदथ पिताशिषं सुतायै
नतशिरसे सहसोन्नमय्य मौलिम् ।
दयितमभिमतं स्वयंवरे त्वं
गुणमयमाप्नुहि वासरैः कियद्भिः ॥
नतशिरसे सहसोन्नमय्य मौलिम् ।
दयितमभिमतं स्वयंवरे त्वं
गुणमयमाप्नुहि वासरैः कियद्भिः ॥
अन्वयः
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अथ पिता नतशिरसे सुतायै सहसा मौलिम् उन्नमय्य आशिषम् व्यतरत् । (आशीः यथा) स्वयंवरे ! त्वम् कियद्भिः वासरैः अभिमतम् गुणमयम् दयितम् आप्नुहि ।
Summary
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Then the father, quickly lifting the head of his daughter who was bowing, gave her a blessing: "O Svayamvara (a term of endearment for one who will choose her own husband), may you obtain your desired, virtuous beloved in the svayamvara in a few days!"
पदच्छेदः
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| व्यतरत् | व्यतरत् (वि√तृ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| अथ | अथ | Then |
| पिता | पितृ (१.१) | the father |
| आशिषम् | आशिस् (२.१) | a blessing |
| सुतायै | सुता (४.१) | to the daughter |
| नतशिरसे | नतशिरस् (४.१) | to her with bowed head |
| सहसा | सहसा | quickly |
| उन्नमय्य | उन्नमय्य (उद्√नम्+णिच्+ल्यप्) | having lifted |
| मौलिम् | मौलि (२.१) | the head |
| दयितम् | दयित (२.१) | beloved |
| अभिमतम् | अभिमत (अभि√मन्+क्त, २.१) | desired |
| स्वयंवरे | स्वयंवर (८.१) | O Svayamvara (one who chooses her husband)! |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| गुणमयम् | गुणमय (२.१) | full of virtues |
| आप्नुहि | आप्नुहि (√आप् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | obtain |
| वासरैः | वासर (३.३) | in days |
| कियद्भिः | कियत् (३.३) | a few |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्य | त | र | द | थ | पि | ता | शि | षं | सु | ता | यै | |
| न | त | शि | र | से | स | ह | सो | न्न | म | य्य | मौ | लिम् |
| द | यि | त | म | भि | म | तं | स्व | यं | व | रे | त्वं | |
| गु | ण | म | य | मा | प्नु | हि | वा | स | रैः | कि | य | द्भिः |
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