कृष्णसारमृगशृङ्गभङ्गुरा
स्वादुरुज्ज्वलरसैकसारिणी ।
नानिशं त्रुटति यन्मुखे पुरा
किन्नरीविकटगीतिझंकृतिः ॥
कृष्णसारमृगशृङ्गभङ्गुरा
स्वादुरुज्ज्वलरसैकसारिणी ।
नानिशं त्रुटति यन्मुखे पुरा
किन्नरीविकटगीतिझंकृतिः ॥
स्वादुरुज्ज्वलरसैकसारिणी ।
नानिशं त्रुटति यन्मुखे पुरा
किन्नरीविकटगीतिझंकृतिः ॥
अन्वयः
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पुरा यत्-मुखे कृष्णसार-मृग-शृङ्ग-भङ्गुरा, स्वादु-उज्ज्वल-रस-एक-सारिणी किन्नरी-विकट-गीति-झंकृतिः अनिशं न त्रुटति स्म ।
Summary
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In whose (Damayanti's) mouth, the resonance of an intense Kinnari song—delicate like the curved horn of a black antelope and the sole stream of sweet and brilliant sentiment—formerly never ceased.
पदच्छेदः
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| कृष्णसार | कृष्णसार | black antelope's |
| मृग | मृग | deer's |
| शृङ्ग | शृङ्ग | horn |
| भङ्गुरा | भङ्गुर (१.१) | delicate like the |
| स्वादु | स्वादु | sweet |
| उज्ज्वल | उज्ज्वल | brilliant |
| रस | रस | sentiment's |
| एक | एक | sole |
| सारिणी | सारिणी (१.१) | stream |
| न | न | not |
| अनिशम् | अनिशम् | constantly |
| त्रुटति | त्रुटति (√त्रुट् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | ceases |
| यत् | यद् | whose |
| मुखे | मुख (७.१) | in the mouth |
| पुरा | पुरा | formerly |
| किन्नरी | किन्नरी | a Kinnari's |
| विकट | विकट | intense |
| गीति | गीति | song's |
| झंकृतिः | झंकृति (१.१) | resonance |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | ष्ण | सा | र | मृ | ग | शृ | ङ्ग | भ | ङ्गु | रा |
| स्वा | दु | रु | ज्ज्व | ल | र | सै | क | सा | रि | णी |
| ना | नि | शं | त्रु | ट | ति | य | न्मु | खे | पु | रा |
| कि | न्न | री | वि | क | ट | गी | ति | झं | कृ | तिः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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