पतत्येतत्तेजोहुतभुजि कदाचिद्यदि तदा
पतङ्गः स्यादङ्गीकृततमपतङ्गापदुदयः ।
यशोऽमुष्येवोपार्जयितुमसमर्थेन विधिना
कथंचित्क्षीराम्भोनिधिरपि कृतस्तत्प्रतिनिधिः ॥
पतत्येतत्तेजोहुतभुजि कदाचिद्यदि तदा
पतङ्गः स्यादङ्गीकृततमपतङ्गापदुदयः ।
यशोऽमुष्येवोपार्जयितुमसमर्थेन विधिना
कथंचित्क्षीराम्भोनिधिरपि कृतस्तत्प्रतिनिधिः ॥
पतङ्गः स्यादङ्गीकृततमपतङ्गापदुदयः ।
यशोऽमुष्येवोपार्जयितुमसमर्थेन विधिना
कथंचित्क्षीराम्भोनिधिरपि कृतस्तत्प्रतिनिधिः ॥
अन्वयः
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यदि कदाचित् पतङ्गः एतत्तेजःहुतभुजि पतति, तदा अङ्गीकृततमपतङ्गापदुदयः स्यात्। असमर्थेन विधिना अमुष्य यशः एव उपार्जयितुम्, कथंचित् क्षीराम्भोनिधिः अपि तत्प्रतिनिधिः कृतः।
Summary
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If the sun were ever to fall into the fire of this king's splendor, it would suffer the fate of a moth, and darkness would prevail. The creator Brahma, unable to create something equal to this king's fame, somehow made the Ocean of Milk as its substitute.
पदच्छेदः
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| पतति | पतति (√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | falls |
| एतत्तेजोहुतभुजि | एतद्–तेजस्–हुतभुज् (७.१) | in the fire of his splendor |
| कदाचित् | कदाचित् | if ever |
| यदि | यदि | if |
| तदा | तदा | then |
| पतङ्गः | पतङ्ग (१.१) | the sun |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| अङ्गीकृततमपतङ्गापदुदयः | अङ्गीकृत–तमस्–पतङ्ग–आपद्–उदय (१.१) | one for whom the calamity of the moth and the rising of darkness would be accepted |
| यशः | यशस् (२.१) | fame |
| अमुष्य | अदस् (६.१) | his |
| एव | एव | just |
| उपार्जयितुम् | उपार्जयितुम् (उप√अर्ज्+तुमुन्) | to create |
| असमर्थेन | असमर्थ (३.१) | by the unable |
| विधिना | विधि (३.१) | by Brahma |
| कथंचित् | कथंचित् | somehow |
| क्षीराम्भोनिधिः | क्षीर–अम्भस्–निधि (१.१) | the ocean of milk |
| अपि | अपि | also |
| कृतः | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
| तत्प्रतिनिधिः | तद्–प्रतिनिधि (१.१) | its substitute |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | त | त्ये | त | त्ते | जो | हु | त | भु | जि | क | दा | चि | द्य | दि | त | दा |
| प | त | ङ्गः | स्या | द | ङ्गी | कृ | त | त | म | प | त | ङ्गा | प | दु | द | यः |
| य | शो | ऽमु | ष्ये | वो | पा | र्ज | यि | तु | म | स | म | र्थे | न | वि | धि | ना |
| क | थं | चि | त्क्षी | रा | म्भो | नि | धि | र | पि | कृ | त | स्त | त्प्र | ति | नि | धिः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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