करेण मीनं निजकेतनं दध-
द्द्रुमालवालाम्बुनिवेशशङ्कया ।
व्यतर्कि सर्वर्तुघने घने मधुं
स मित्रमत्रानुसरन्निव स्मरः ॥
करेण मीनं निजकेतनं दध-
द्द्रुमालवालाम्बुनिवेशशङ्कया ।
व्यतर्कि सर्वर्तुघने घने मधुं
स मित्रमत्रानुसरन्निव स्मरः ॥
द्द्रुमालवालाम्बुनिवेशशङ्कया ।
व्यतर्कि सर्वर्तुघने घने मधुं
स मित्रमत्रानुसरन्निव स्मरः ॥
अन्वयः
AI
अत्र सर्वर्तुघने घने, द्रुमालवालाम्बुनिवेशशङ्कया करेण निजकेतनम् मीनम् दधत्, मित्रम् मधुम् अनुसरन् स्मरः इव सः व्यतर्कि।
Summary
AI
Here in this dense forest where all seasons thrived, Nala was surmised to be like Kama, the god of love, following his friend, the Spring season, while holding his fish-banner in his hand, fearing it might leap into the water basins at the foot of the trees.
पदच्छेदः
AI
| करेण | कर (३.१) | with his hand |
| मीनम् | मीन (२.१) | the fish |
| निजकेतनम् | निज–केतन (२.१) | his own banner |
| दधत् | दधत् (√धा+शतृ, १.१) | holding |
| द्रुमालवालाम्बुनिवेशशङ्कया | द्रुम–आलवाल–अम्बु–निवेश–शङ्का (३.१) | with the suspicion of it entering the water at the base of the trees |
| व्यतर्कि | व्यतर्कि (वि√तर्क् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was surmised |
| सर्वर्तुघने | सर्वर्तुघन (७.१) | where all seasons were abundant |
| घने | घन (७.१) | in the dense forest |
| मधुम् | मधु (२.१) | the spring season |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मित्रम् | मित्र (२.१) | friend |
| अत्र | अत्र | here |
| अनुसरन् | अनुसरत् (अनु√सृ+शतृ, १.१) | following |
| इव | इव | as if |
| स्मरः | स्मर (१.१) | Kama, the god of love |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रे | ण | मी | नं | नि | ज | के | त | नं | द | ध |
| द्द्रु | मा | ल | वा | ला | म्बु | नि | वे | श | श | ङ्क | या |
| व्य | त | र्कि | स | र्व | र्तु | घ | ने | घ | ने | म | धुं |
| स | मि | त्र | म | त्रा | नु | स | र | न्नि | व | स्म | रः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.