द्विधा प्रयुक्तेन च वाङ्मयेन
सरस्वती तन्मिथुनं नुनाव ।
संस्कारपूतेन वरं वरेण्यं
वधूं सुखग्राह्यनिबन्धनेन ॥
द्विधा प्रयुक्तेन च वाङ्मयेन
सरस्वती तन्मिथुनं नुनाव ।
संस्कारपूतेन वरं वरेण्यं
वधूं सुखग्राह्यनिबन्धनेन ॥
सरस्वती तन्मिथुनं नुनाव ।
संस्कारपूतेन वरं वरेण्यं
वधूं सुखग्राह्यनिबन्धनेन ॥
अन्वयः
AI
सरस्वती च द्विधा प्रयुक्तेन वाङ्मयेन तत् मिथुनम् नुनाव। संस्कारपूतेन (वाङ्मयेन) वरेण्यम् वरम्, सुखग्राह्यनिबन्धनेन (वाङ्मयेन) वधूम् (नुनाव)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
द्विधेति । अथ सरस्वती वाग्देनी द्विधा संस्कृतप्राकृतरुपेण द्वैविध्येन प्रयुक्तेनोच्चारितेन वाङ्मयेन शब्दजालेन तन्मिथुनं नुनाव तुष्टाव । `णु स्तुतौ` इति धातोर्लिट् । केन कमित्याह-संस्कारेति । संस्कारेण शास्त्रव्युत्पत्त्या पूतेन प्रकृतिप्रत्ययविभागशुद्धेन । संस्कृतेनेत्यर्थः । वरेण्यं वरणीयम् । श्लाध्यमित्यर्थः । वृणोतेरौणादिक एण्यप्रत्ययः । वरं वोढारं शिवम् । सुखेन ग्राह्यं सुबोधं निबन्धनं रचना यस्य तेन वाङ्मयेन प्राकृतभाषयेत्यर्थः । वधूं नुनावेत्यनेन संम्बन्धः
Summary
AI
Saraswati also praised the couple with speech employed in two ways: she praised the excellent groom with words purified by sacred tradition (Vedic chants), and the bride with compositions that were sweet and easy to understand (secular poetry).
सारांश
AI
देवी सरस्वती ने दो प्रकार की वाणी में उन दोनों की स्तुति की—वर के लिए संस्कारित संस्कृत में और वधू के लिए मधुर एवं सरल प्राकृत भाषा में।
पदच्छेदः
AI
| द्विधा | द्विधा | in two ways |
| प्रयुक्तेन | प्रयुक्त (प्र√युज्+क्त, ३.१) | employed |
| च | च | and |
| वाङ्मयेन | वाङ्मय (३.१) | with speech |
| सरस्वती | सरस्वती (१.१) | Saraswati |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| मिथुनम् | मिथुन (२.१) | couple |
| नुनाव | नुनाव (√नु कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | praised |
| संस्कारपूतेन | संस्कार–पूत (√पू+क्त, ३.१) | with that which is purified by sacred tradition |
| वरम् | वर (२.१) | the groom |
| वरेण्यम् | वरेण्य (√वृ+एण्य, २.१) | excellent |
| वधूम् | वधू (२.१) | the bride |
| सुखग्राह्यनिबन्धनेन | सुख–ग्राह्य (√ग्रह्+ण्यत्)–निबन्धन (३.१) | with that which has a composition easy to grasp |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्वि | धा | प्र | यु | क्ते | न | च | वा | ङ्म | ये | न |
| स | र | स्व | ती | त | न्मि | थु | नं | नु | ना | व |
| सं | स्का | र | पू | ते | न | व | रं | व | रे | ण्यं |
| व | धूं | सु | ख | ग्रा | ह्य | नि | ब | न्ध | ने | न |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.