कॢप्तोपचारां चतुरस्रवेदीं
तावेत्य पश्चाट्कनकासनस्थौ ।
जायापती लौकिकमेषितव्य-
मार्द्राक्षतारोपणमन्वभूताम् ॥
कॢप्तोपचारां चतुरस्रवेदीं
तावेत्य पश्चाट्कनकासनस्थौ ।
जायापती लौकिकमेषितव्य-
मार्द्राक्षतारोपणमन्वभूताम् ॥
तावेत्य पश्चाट्कनकासनस्थौ ।
जायापती लौकिकमेषितव्य-
मार्द्राक्षतारोपणमन्वभूताम् ॥
अन्वयः
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पश्चात् तौ जायापती कॢप्तोपचाराम् चतुरस्रवेदीम् एत्य कनकासनस्थौ (सन्तौ) एषितव्यम् लौकिकम् आर्द्राक्षतारोपणम् अन्वभूताम्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
क्लृप्तेति । तौ जायापती वधूवरौ पश्चान्नमस्कारानन्तरं क्लृप्ता रचिता उपचारा पुष्परचनादयो यस्यां तां चतुरस्त्रवेदीमेत्य प्राप्य कनकासनस्थौ सन्तौ लौकिकं लोके विदितम् । आचारप्राप्तमित्यर्थः । अतएवैषणीयमाशास्यम् । `तथाहि लौकिकाचारं मनसापि न लङ्घयेत्` इति शास्त्रादवश्यकर्तव्यमित्यर्थः । इषेरिच्छार्थादनीयप्रत्ययः । आर्द्राक्षतारोपणमन्वभूताम्
Summary
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Afterwards, the husband and wife, approaching the prepared square altar and seated on a golden throne, experienced the customary and desirable worldly ritual of placing wet, unbroken rice grains on each other.
सारांश
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सुसज्जित वेदी पर स्वर्ण आसन पर बैठकर शिव और पार्वती ने लौकिक परंपरा के अनुसार मंगलकारी गीले अक्षत अपने ऊपर डलवाए।
पदच्छेदः
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| कॢप्तोपचारां | कॢप्त (√कॢप्+क्त)–उपचार (२.१) | prepared with offerings |
| चतुरस्रवेदीं | चतुरस्र–वेदी (२.१) | the square altar |
| तौ | तद् (१.२) | the two |
| एत्य | एत्य (√इ+ल्यप्) | having approached |
| पश्चात् | पश्चात् | afterwards |
| कनकासनस्थौ | कनक–आसन–स्थ (√स्था, १.२) | seated on a golden throne |
| जायापती | जायापती (१.२) | the husband and wife |
| लौकिकम् | लौकिक (२.१) | customary |
| एषितव्यम् | एषितव्य (√इष्+तव्यत्, २.१) | desirable |
| आर्द्राक्षतारोपणम् | आर्द्र–अक्षत–आरोपण (२.१) | the placing of wet, unbroken rice grains |
| अन्वभूताम् | अन्वभूताम् (अनु√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | experienced |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कॢ | प्तो | प | चा | रां | च | तु | र | स्र | वे | दीं |
| ता | वे | त्य | प | श्चा | ट्क | न | का | स | न | स्थौ |
| जा | या | प | ती | लौ | कि | क | मे | षि | त | व्य |
| मा | र्द्रा | क्ष | ता | रो | प | ण | म | न्व | भू | ताम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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