स वृषध्वजसायकावभिन्नं
जयहेतुः प्रतिकायमेषणीयम् ।
लघु साधयितुं शरः प्रसेहे
विधिनेवार्थमुदीरितं प्रयत्नः ॥
स वृषध्वजसायकावभिन्नं
जयहेतुः प्रतिकायमेषणीयम् ।
लघु साधयितुं शरः प्रसेहे
विधिनेवार्थमुदीरितं प्रयत्नः ॥
जयहेतुः प्रतिकायमेषणीयम् ।
लघु साधयितुं शरः प्रसेहे
विधिनेवार्थमुदीरितं प्रयत्नः ॥
सारांश
AI
शिव के बाण के साथ अर्जुन के बाण ने वराह को वैसे ही भेदा जैसे विधि के अनुकूल किया गया प्रयत्न फल को सुगमता से सिद्ध करता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स इति ॥ जयहेतुः स शरो वृषध्वजसायकावभिन्नं शिवशरविद्धमेषणीयम् । वेद्धुमिति शेषः । इषेरिच्छार्थादनीयर् प्रत्ययः । प्रतिकायम् । प्रतिपक्षमिति यावत् । विधिना विधिवाक्येनोदीरितं फलसाधनतया प्रतिपादितमर्थं यागादिकं प्रयत्नः पुरुषव्यापार इव । लघ्वक्लेशेन यथा तथा साधयितुम् । स्वार्थणिजन्तात्तुमुन् । प्रसेहे शशाक । उपमालंकारः।
छन्दः
औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | वृ | ष | ध्व | ज | सा | य | का | व | भि | न्नं | |
| ज | य | हे | तुः | प्र | ति | का | य | मे | ष | णी | यम् |
| ल | घु | सा | ध | यि | तुं | श | रः | प्र | से | हे | |
| वि | धि | ने | वा | र्थ | मु | दी | रि | तं | प्र | य | त्नः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.