रसानामाधारैरपरिचितदोषः सहृदयै-
र्मुरारातेः क्रीडानिविडघटनारूपमहितः ।
प्रबन्धोऽयं बन्धोरखिलजगतां तस्य सरसां
प्रभोरन्तः सान्द्रां प्रमदलहरीं पल्लवयतु ॥
रसानामाधारैरपरिचितदोषः सहृदयै-
र्मुरारातेः क्रीडानिविडघटनारूपमहितः ।
प्रबन्धोऽयं बन्धोरखिलजगतां तस्य सरसां
प्रभोरन्तः सान्द्रां प्रमदलहरीं पल्लवयतु ॥
र्मुरारातेः क्रीडानिविडघटनारूपमहितः ।
प्रबन्धोऽयं बन्धोरखिलजगतां तस्य सरसां
प्रभोरन्तः सान्द्रां प्रमदलहरीं पल्लवयतु ॥
अन्वयः
AI
रसानाम् आधारैः सहृदयैः अपरिचित-दोषः मुरारातेः क्रीडा-निविड-घटना-रूप-महितः अयम् प्रबन्धः अखिल-जगताम् बन्धोः तस्य सरसाम् प्रभोः अन्तः सान्द्राम् प्रमद-लहरीम् पल्लवयतु।
Summary
AI
May this composition, which is free from faults according to the connoisseurs of rasas and glorified by its portrayal of the intimate pastimes of Murārāti, cause a dense wave of intense bliss to blossom within the heart of that graceful Lord, the friend of the entire universe.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | सा | ना | मा | धा | रै | र | प | रि | चि | त | दो | षः | स | हृ | द | यै |
| र्मु | रा | रा | तेः | क्री | डा | नि | वि | ड | घ | ट | ना | रू | प | म | हि | तः |
| प्र | ब | न्धो | ऽयं | ब | न्धो | र | खि | ल | ज | ग | तां | त | स्य | स | र | सां |
| प्र | भो | र | न्तः | सा | न्द्रां | प्र | म | द | ल | ह | रीं | प | ल्ल | व | य | तु |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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