नैतन्मतं मत्कमिति ब्रुवाणः
सहस्रशोऽसौ शपथानशप्यत् ।
उद्वाश्यमानः पितरं सरामं
लुठ्यन्सशोको भुवि रोरुदावान् ॥
नैतन्मतं मत्कमिति ब्रुवाणः
सहस्रशोऽसौ शपथानशप्यत् ।
उद्वाश्यमानः पितरं सरामं
लुठ्यन्सशोको भुवि रोरुदावान् ॥
सहस्रशोऽसौ शपथानशप्यत् ।
उद्वाश्यमानः पितरं सरामं
लुठ्यन्सशोको भुवि रोरुदावान् ॥
Karandikar
"This idea is not mine." Thus saying he (Bharata) swore thousands of oaths; loudly crying for his father and Rama, and wallowing on the ground he wept and wept (continuously)
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नै | त | न्म | तं | म | त्क | मि | ति | ब्रु | वा | णः |
| स | ह | स्र | शो | ऽसौ | श | प | था | न | श | प्य |
| तु | द्वा | श्य | मा | नः | पि | त | रं | स | रा | मं |
| लु | ठ्य | न्स | शो | को | भु | वि | रो | रु | दा | वान् |
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.