तूर्याणामथ निःस्वनेन सकलं लोकं समापूरय-
न्विक्रान्तैः करिणां गिरीन्द्रसदृशां क्ष्मां कम्पयन्सर्वतः ।
साऽऽनन्दाऽश्रुविलोचनः प्रकृतिभिः सार्धं सहाऽन्तः पुरः
सम्प्राप्तो भरतः समारुतिरलं नम्रः समं मातृभिः ॥
तूर्याणामथ निःस्वनेन सकलं लोकं समापूरय-
न्विक्रान्तैः करिणां गिरीन्द्रसदृशां क्ष्मां कम्पयन्सर्वतः ।
साऽऽनन्दाऽश्रुविलोचनः प्रकृतिभिः सार्धं सहाऽन्तः पुरः
सम्प्राप्तो भरतः समारुतिरलं नम्रः समं मातृभिः ॥
न्विक्रान्तैः करिणां गिरीन्द्रसदृशां क्ष्मां कम्पयन्सर्वतः ।
साऽऽनन्दाऽश्रुविलोचनः प्रकृतिभिः सार्धं सहाऽन्तः पुरः
सम्प्राप्तो भरतः समारुतिरलं नम्रः समं मातृभिः ॥
Karandikar
Thereafter, pervading the whole world with the loud blare of the trumpet, causing the earth to quake on all sides by the strides of the monkeys, (by Rama) was reached Bharata along with the mothers accompanied by the ladies of the harem, with the subjects and in the company of Maruti, Bharata whose eyes bore tears of joy and who was amply bowed down (in salutation).
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तू | र्या | णा | म | थ | निः | स्व | ने | न | स | क | लं | लो | कं | स | मा | पू | र | य |
| न्वि | क्रा | न्तैः | क | रि | णां | गि | री | न्द्र | स | दृ | शां | क्ष्मां | क | म्प | य | न्स | र्व | तः |
| सा | ऽऽन | न्दा | ऽश्रु | वि | लो | च | नः | प्र | कृ | ति | भिः | सा | र्धं | स | हा | ऽन्तः | पु | रः |
| स | म्प्रा | प्तो | भ | र | तः | स | मा | रु | ति | र | लं | न | म्रः | स | मं | मा | तृ | भिः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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