भृतनिखिलरसातलः सरत्नः
शिखरिसमोर्मितिरोहिताऽन्तरीक्षः ।
कुत इह परमाऽर्थतो जलौघो
जलनिधिमीयुरतः समेत्य मायाम् ॥
भृतनिखिलरसातलः सरत्नः
शिखरिसमोर्मितिरोहिताऽन्तरीक्षः ।
कुत इह परमाऽर्थतो जलौघो
जलनिधिमीयुरतः समेत्य मायाम् ॥
शिखरिसमोर्मितिरोहिताऽन्तरीक्षः ।
कुत इह परमाऽर्थतो जलौघो
जलनिधिमीयुरतः समेत्य मायाम् ॥
Karandikar
–having reached which (viz. the ocean) the monkeys attained an illusion : Whence (could) here be in reality a reservoir of water that pervaded the whole nether world, contained gems and veiled the sky with its mountain-like waves
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भृ | त | नि | खि | ल | र | सा | त | लः | स | र | त्नः | |
| शि | ख | रि | स | मो | र्मि | ति | रो | हि | ता | ऽन्त | री | क्षः |
| कु | त | इ | ह | प | र | मा | ऽर्थ | तो | ज | लौ | घो | |
| ज | ल | नि | धि | मी | यु | र | तः | स | मे | त्य | मा | याम् |
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