भूतानां प्रभवस्थितिप्रविलयास्त्वय्येव विश्वम्भरे
त्वद्गर्भे ननु ते रसातलजुषो दैत्याः फणीन्द्राश्च ये ।
त्वं सर्वैरुपजीव्यसे दिविचरैस्त्वत्तोऽपि किञ्चित्परं
न स्यात्स्यादपि तन्निरस्तविषयं ब्रह्म त्वमेवासि नः ॥
भूतानां प्रभवस्थितिप्रविलयास्त्वय्येव विश्वम्भरे
त्वद्गर्भे ननु ते रसातलजुषो दैत्याः फणीन्द्राश्च ये ।
त्वं सर्वैरुपजीव्यसे दिविचरैस्त्वत्तोऽपि किञ्चित्परं
न स्यात्स्यादपि तन्निरस्तविषयं ब्रह्म त्वमेवासि नः ॥
त्वद्गर्भे ननु ते रसातलजुषो दैत्याः फणीन्द्राश्च ये ।
त्वं सर्वैरुपजीव्यसे दिविचरैस्त्वत्तोऽपि किञ्चित्परं
न स्यात्स्यादपि तन्निरस्तविषयं ब्रह्म त्वमेवासि नः ॥
अन्वयः
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विश्वम्भरे, भूतानाम् प्रभव-स्थिति-प्रविलयाः त्वयि एव (भवन्ति) । ननु ये रसातल-जुषः दैत्याः फणि-इन्द्राः च (सन्ति), ते (अपि) त्वत्-गर्भे (सन्ति) । त्वम् सर्वैः दिवि-चरैः उपजीव्यसे । त्वत्तः परम् किञ्चित् अपि न स्यात् । अपि (यदि किञ्चित्) स्यात्, तत् निरस्त-विषयम् ब्रह्म (स्यात्) । (अतः) त्वम् एव नः ब्रह्म असि ।
Summary
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O Earth, supporter of the world, the creation, sustenance, and dissolution of all beings occur in you alone. The demons and serpent-lords who inhabit the netherworld are also within your womb. You are depended upon by all the gods in heaven. There can be nothing superior to you. Even if there were, it would be the objectless Brahman. Therefore, for us, you alone are Brahman.
पदच्छेदः
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| भूतानाम् | भूत (६.३) | of beings |
| प्रभव | भू (प्र√भू) | origin |
| स्थिति | स्था | sustenance |
| प्रविलयाः | ली (प्र+वि√ली)–प्रविलय (१.३) | and dissolutions |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | in you |
| एव | एव | alone |
| विश्वम्भरे | विश्वम्भर (८.१) | O supporter of the world |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| गर्भे | गर्भ (७.१) | in the womb |
| ननु | ननु | surely |
| ते | तद् (१.३) | those |
| रसातल | रसातल | netherworld |
| जुषः | जुष् (√जुष्, १.३) | inhabiting |
| दैत्याः | दैत्य (१.३) | demons |
| फणि | फणिन् | serpent |
| इन्द्राः | इन्द्र (१.३) | lords |
| च | च | and |
| ये | यद् (१.३) | who |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| सर्वैः | सर्व (३.३) | by all |
| उपजीव्यसे | उपजीव्यसे (उप√जीव् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | are depended upon |
| दिवि | दिव् | in heaven |
| चरैः | चर (√चर्, ३.३) | by the wanderers |
| त्वत्तः | युष्मद् (५.१) | than you |
| अपि | अपि | even |
| किञ्चित् | किञ्चित् | anything |
| परम् | पर (१.१) | superior |
| न | न | not |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can be |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it may be |
| अपि | अपि | even if |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| निरस्त | निरस्त (निर्√अस्+क्त) | devoid of |
| विषयम् | विषय (१.१) | objects |
| ब्रह्म | ब्रह्मन् (१.१) | Brahman |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| एव | एव | alone |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are |
| नः | अस्मद् (६.३) | for us |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भू | ता | नां | प्र | भ | व | स्थि | ति | प्र | वि | ल | या | स्त्व | य्ये | व | वि | श्व | म्भ | रे |
| त्व | द्ग | र्भे | न | नु | ते | र | सा | त | ल | जु | षो | दै | त्याः | फ | णी | न्द्रा | श्च | ये |
| त्वं | स | र्वै | रु | प | जी | व्य | से | दि | वि | च | रै | स्त्व | त्तो | ऽपि | कि | ञ्चि | त्प | रं |
| न | स्या | त्स्या | द | पि | त | न्नि | र | स्त | वि | ष | यं | ब्र | ह्म | त्व | मे | वा | सि | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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