प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः ।
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥

अन्वयः AI यः च सर्वशः कर्माणि प्रकृत्या एव क्रियमाणानि पश्यति, तथा आत्मानम् अकर्तारम् पश्यति, सः (एव) पश्यति ।
Summary AI He who sees that all actions are performed in every way by Prakriti alone, and likewise sees the Self as the non-doer, he truly sees.
सारांश AI जो यह देखता है कि समस्त कर्म प्रकृति द्वारा ही किए जा रहे हैं और आत्मा अकर्ता है, वही वास्तव में सत्य का ज्ञाता है।
पदच्छेदः AI
प्रकृत्याप्रकृति (३.१) by Prakriti
एवएव alone
and
कर्माणिकर्मन् (२.३) actions
क्रियमाणानिक्रियमाण (√कृ+शानच्, २.३) being performed
सर्वशःसर्वशस् in all respects
यःयद् (१.१) He who
पश्यतिपश्यति (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) sees
तथातथा and
आत्मानम्आत्मन् (२.१) the Self
अकर्तारम्अकर्तृ (२.१) as a non-doer
सःतद् (१.१) he
पश्यतिपश्यति (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) truly sees
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
प्र कृ त्यै र्मा णि
क्रि मा णा नि र्व शः
यः श्य ति था त्मा
र्ता रं श्य ति
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