आच्छाद्य पुष्पपटमेव महान्तमन्त-
रावर्तिभिर्गृहकपोतशिरोधराभैः ।
शस्वङ्गानि धूमरुचिमागुर-
वीं दधानैर्धूपायतीव पटलैर्नीरदानाम् ॥
आच्छाद्य पुष्पपटमेव महान्तमन्त-
रावर्तिभिर्गृहकपोतशिरोधराभैः ।
शस्वङ्गानि धूमरुचिमागुर-
वीं दधानैर्धूपायतीव पटलैर्नीरदानाम् ॥
रावर्तिभिर्गृहकपोतशिरोधराभैः ।
शस्वङ्गानि धूमरुचिमागुर-
वीं दधानैर्धूपायतीव पटलैर्नीरदानाम् ॥
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | च्छा | द्य | पु | ष्प | प | ट | मे | व | म | हा | न्त | म | न्त | ||
| रा | व | र्ति | भि | र्गृ | ह | क | पो | त | शि | रो | ध | रा | भैः | ||
| श | स्व | ङ्गा | नि | धू | म | रु | चि | मा | गु | र | |||||
| वीं | द | धा | नै | र्धू | पा | य | ती | व | प | ट | लै | र्नी | र | दा | नाम् |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.