अन्वयः
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विद्वत्त्वं च नृपत्वं च कदाचन न एव तुल्यम् । राजा स्व-देशे पूज्यते विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ।
Summary
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Scholarship and kingship are never comparable. A king is honored only within his own kingdom, but a scholar is respected everywhere he goes.
सारांश
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विद्वत्ता और राजपद की तुलना नहीं हो सकती; राजा केवल अपने देश में सम्मान पाता है, जबकि विद्वान हर जगह पूजा जाता है।
पदच्छेदः
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| विद्वत्त्वम् | विद्वत्त्व (१.१) | scholarship |
| च | च | and |
| नृपत्वम् | नृपत्व (१.१) | kingship |
| च | च | and |
| न | न | not |
| एव | एव | indeed |
| तुल्यम् | तुल्य (१.१) | equal |
| कदाचन | कदाचन | ever |
| स्व-देशे | स्व–देश (७.१) | in one's own country |
| पूज्यते | पूज्यते (√पूज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is honored |
| राजा | राजन् (१.१) | king |
| विद्वान् | विद्वस् (१.१) | scholar |
| सर्वत्र | सर्वत्र | everywhere |
| पूज्यते | पूज्यते (√पूज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is honored |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | द्व | त्त्वं | च | नृ | प | त्वं | च |
| नै | व | तु | ल्यं | क | दा | च | न |
| स्व | दे | शे | पू | ज्य | ते | रा | जा |
| वि | द्वा | न्स | र्व | त्र | पू | ज्य | ते |
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