उल्लङ्घ्य निर्माल्यमुदासितं य
दजानतानेन पदे भवत्याः ।
तत्स्वामिनि स्वामिनि वासवे नः
क्षन्तव्यमित्येव निवेदयामः ॥
उल्लङ्घ्य निर्माल्यमुदासितं य
दजानतानेन पदे भवत्याः ।
तत्स्वामिनि स्वामिनि वासवे नः
क्षन्तव्यमित्येव निवेदयामः ॥
दजानतानेन पदे भवत्याः ।
तत्स्वामिनि स्वामिनि वासवे नः
क्षन्तव्यमित्येव निवेदयामः ॥
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | ल्ल | ङ्घ्य | नि | र्मा | ल्य | मु | दा | सि | तं | य |
| द | जा | न | ता | ने | न | प | दे | भ | व | त्याः |
| त | त्स्वा | मि | नि | स्वा | मि | नि | वा | स | वे | नः |
| क्ष | न्त | व्य | मि | त्ये | व | नि | वे | द | या | मः |
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