वन्दामहे कमलनाभमनन्तमाद्यं
वन्दामहे भुवनमोहनशक्तिमैशीम् ।
वन्दामहे तदुभयाद्वयवादमूल
मानीलकण्ठमवतंसितचन्द्ररेखम् ॥
वन्दामहे कमलनाभमनन्तमाद्यं
वन्दामहे भुवनमोहनशक्तिमैशीम् ।
वन्दामहे तदुभयाद्वयवादमूल
मानीलकण्ठमवतंसितचन्द्ररेखम् ॥
वन्दामहे भुवनमोहनशक्तिमैशीम् ।
वन्दामहे तदुभयाद्वयवादमूल
मानीलकण्ठमवतंसितचन्द्ररेखम् ॥
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | न्दा | म | हे | क | म | ल | ना | भ | म | न | न्त | मा | द्यं |
| व | न्दा | म | हे | भु | व | न | मो | ह | न | श | क्ति | मै | शीम् |
| व | न्दा | म | हे | त | दु | भ | या | द्व | य | वा | द | मू | ल |
| मा | नी | ल | क | ण्ठ | म | व | तं | सि | त | च | न्द्र | रे | खम् |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.