अभ्युद्यतीं मथनतः किल निष्कलङ्का
मानन्दकन्दलमयीममृतांशुरेखाम् ।
उत्तंसपुष्पकलिकेयमुमापतेरि
त्यालोचयन्नुपददे मनसा मुकुन्दः ॥
अभ्युद्यतीं मथनतः किल निष्कलङ्का
मानन्दकन्दलमयीममृतांशुरेखाम् ।
उत्तंसपुष्पकलिकेयमुमापतेरि
त्यालोचयन्नुपददे मनसा मुकुन्दः ॥
मानन्दकन्दलमयीममृतांशुरेखाम् ।
उत्तंसपुष्पकलिकेयमुमापतेरि
त्यालोचयन्नुपददे मनसा मुकुन्दः ॥
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भ्यु | द्य | तीं | म | थ | न | तः | कि | ल | नि | ष्क | ल | ङ्का |
| मा | न | न्द | क | न्द | ल | म | यी | म | मृ | तां | शु | रे | खाम् |
| उ | त्तं | स | पु | ष्प | क | लि | के | य | मु | मा | प | ते | रि |
| त्या | लो | च | य | न्नु | प | द | दे | म | न | सा | मु | कु | न्दः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.