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स्खलदचलसमुद्भवल्लोलकल्लोलकोलाहल
व्यतिकरबधिरभ्रमत्कूर्मनक्रद्विपक्रन्दितैः ।
स्फुटितकमलजाण्डभाण्डप्रचण्डस्वनोत्प्रेक्षण
क्षुभितविविधमुक्तहाहारवैश्चाहसीदच्युतः ॥

छन्दः नाराचम् [१८: ननरररर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८
स्ख मु द्भ ल्लो ल्लो को ला
व्य ति धि भ्र त्कू र्म क्र द्वि क्र न्दि तैः
स्फु टि जा ण्ड भा ण्ड प्र ण्ड स्व नो त्प्रे क्ष
क्षु भि वि वि मु क्त हा हा वै श्चा सी च्यु तः
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