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निष्पतद्रुममुत्पतत्खगमद्भुतस्खलदश्मभू
जर्झरस्रुतनिर्झराम्बुझझारवभैरवम् ।
गर्भगहरनिर्भरभ्रमदुद्भटानिलपूरित
क्रन्ददन्तरकन्दरं किल मन्दरं ददृशुर्जनाः ॥

छन्दः मल्लिकामाला
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८
नि ष्प द्रु मु त्प त्ख द्भु स्ख श्म भू
र्झ स्रु नि र्झ रा म्बु झा भै वम्
र्भ नि र्भ भ्र दु द्भ टा नि पू रि
क्र न्द न्त न्द रं कि न्द रं दृ शु र्ज नाः
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