विस्तारः
निर्भज्य एक भागशुन्यं कृत्वा ॥
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | मृ | तं | य | दि | भो | क्त | व्य |
| म | नु | म | न्या | म | हे | त | राम् |
| सं | वि | भ | ज्यै | व | त | द्भो | ज्यं |
| न | नि | र्भ | ज्ये | ति | नो | म | तिः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.