कालोऽत्यगादशुभहेतुरुपस्थितं वः
कल्याणमद्य न चिरादिति भामते नः ।
उत्तिष्ठतोचलत याम तु धाम धातु
रुष्ट्रासिकाभिरधुना किमनर्थिकाभिः ॥
कालोऽत्यगादशुभहेतुरुपस्थितं वः
कल्याणमद्य न चिरादिति भामते नः ।
उत्तिष्ठतोचलत याम तु धाम धातु
रुष्ट्रासिकाभिरधुना किमनर्थिकाभिः ॥
कल्याणमद्य न चिरादिति भामते नः ।
उत्तिष्ठतोचलत याम तु धाम धातु
रुष्ट्रासिकाभिरधुना किमनर्थिकाभिः ॥
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | लो | ऽत्य | गा | द | शु | भ | हे | तु | रु | प | स्थि | तं | वः |
| क | ल्या | ण | म | द्य | न | चि | रा | दि | ति | भा | म | ते | नः |
| उ | त्ति | ष्ठ | तो | च | ल | त | या | म | तु | धा | म | धा | तु |
| रु | ष्ट्रा | सि | का | भि | र | धु | ना | कि | म | न | र्थि | का | भिः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.