अतिप्रबन्धादिषुजालवृष्टे-
रपक्रमाच्च द्युमणेरकाण्डे ।
आसीत्तमिस्रा जयदा रिपूणां
पचेलिमा भाग्यपरम्परेव ॥
अतिप्रबन्धादिषुजालवृष्टे-
रपक्रमाच्च द्युमणेरकाण्डे ।
आसीत्तमिस्रा जयदा रिपूणां
पचेलिमा भाग्यपरम्परेव ॥
रपक्रमाच्च द्युमणेरकाण्डे ।
आसीत्तमिस्रा जयदा रिपूणां
पचेलिमा भाग्यपरम्परेव ॥
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ति | प्र | ब | न्धा | दि | षु | जा | ल | वृ | ष्टे |
| र | प | क्र | मा | च्च | द्यु | म | णे | र | का | ण्डे |
| आ | सी | त्त | मि | स्रा | ज | य | दा | रि | पू | णां |
| प | चे | लि | मा | भा | ग्य | प | र | म्प | रे | व |
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