अन्वयः
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प्रसर्पितकम्, तथा सिंहविक्रीडितम्, सिंहाकर्षितम्, उद्वृत्तम्, तथा उपसृतम् एव च उद्दिष्टम् (अस्ति)।
Summary
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Prasarpitaka, Siṃhavikrīḍita, Siṃhākarṣita, Udvṛtta, and Upasṛta are also mentioned.
पदच्छेदः
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| प्रसर्पितकम् | प्रसर्पितक (१.१) | Prasarpitaka |
| उद्दिष्टम् | उद्दिष्ट (उद्√दिश्+क्त, १.१) | is mentioned |
| सिंहविक्रीडितम् | सिंह–विक्रीडित (१.१) | Siṃhavikrīḍita |
| तथा | तथा | and |
| सिंहाकर्षितम् | सिंह–आकर्षित (१.१) | Siṃhākarṣita |
| उद्वृत्तम् | उद्वृत्त (उद्√वृत्+क्त, १.१) | Udvṛtta |
| तथा | तथा | and |
| उपसृतम् | उपसृत (उप√सृ+क्त, १.१) | Upasṛta |
| एव | एव | also |
| च | च | and |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | स | र्पि | त | क | मु | द्दि | ष्टं |
| सिं | ह | वि | क्री | ड | तं | त | था |
| सिं | हा | क | र्षि | त | मु | द्वृ | त्तं |
| त | थो | प | सृ | त | मे | व | च |
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