मां दुष्टां ज्वलितवपुः प्लुषाण वह्ने
संरक्ष क्षतमलिनां सुहृद्यथा वा ।
एषाऽहं क्रतुषु वसोर्यथाऽऽज्यधारा
त्वां प्राप्ता विधिवदुदीर्णदीप्तिमालम् ॥
मां दुष्टां ज्वलितवपुः प्लुषाण वह्ने
संरक्ष क्षतमलिनां सुहृद्यथा वा ।
एषाऽहं क्रतुषु वसोर्यथाऽऽज्यधारा
त्वां प्राप्ता विधिवदुदीर्णदीप्तिमालम् ॥
संरक्ष क्षतमलिनां सुहृद्यथा वा ।
एषाऽहं क्रतुषु वसोर्यथाऽऽज्यधारा
त्वां प्राप्ता विधिवदुदीर्णदीप्तिमालम् ॥
Karandikar
Oh Fire of a blazing form, burn me out, (if I be) violated (Sullied); otherwise protect (me) like a friend (who is) disproved (to be) impure. Here, like the stream (trickle) of ghee for Vasu, have I, according to the prescribed rites, come to you who have shot out a garland of flames. ”
छन्दः
प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मां | दु | ष्टां | ज्व | लि | त | व | पुः | प्लु | षा | ण | व | ह्ने |
| सं | र | क्ष | क्ष | त | म | लि | नां | सु | हृ | द्य | था | वा |
| ए | षा | ऽहं | क्र | तु | षु | व | सो | र्य | था | ऽऽज्य | धा | रा |
| त्वां | प्रा | प्ता | वि | धि | व | दु | दी | र्ण | दी | प्ति | मा | लम् |
| म | न | ज | र | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.