समगतकपिसैन्यं सम्मदेनाऽतिमात्रं
विटपहरिणनाथः सिद्धिमौहिष्ट नित्याम् ।
नृपतिमतिररंस्त प्राप्तकामेव हर्षा-
त्रजनिचरपतीनां सन्ततोऽतायि शोकः ॥
समगतकपिसैन्यं सम्मदेनाऽतिमात्रं
विटपहरिणनाथः सिद्धिमौहिष्ट नित्याम् ।
नृपतिमतिररंस्त प्राप्तकामेव हर्षा-
त्रजनिचरपतीनां सन्ततोऽतायि शोकः ॥
विटपहरिणनाथः सिद्धिमौहिष्ट नित्याम् ।
नृपतिमतिररंस्त प्राप्तकामेव हर्षा-
त्रजनिचरपतीनां सन्ततोऽतायि शोकः ॥
Karandikar
The monkey army was overwhelmed with exultation; the lord of the monkeys inferred eternal victory ; the Kings mind exulted through joy as if it had secured its desires ; the grief of the King of the demons waxed unabated.
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | म | ग | त | क | पि | सै | न्यं | स | म्म | दे | ना | ऽति | मा | त्रं |
| वि | ट | प | ह | रि | ण | ना | थः | सि | द्धि | मौ | हि | ष्ट | नि | त्याम् |
| नृ | प | ति | म | ति | र | रं | स्त | प्रा | प्त | का | मे | व | ह | र्षा |
| त्र | ज | नि | च | र | प | ती | नां | स | न्त | तो | ऽता | यि | शो | कः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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