एकः पदातिः पुरुषो धनुष्मा-
न्योऽनेकमायानि वियद्गतानि ।
रक्षःसहस्राणि चतुर्दशाऽऽर्दी-
त्का तत्र वो मानुषमात्रशङ्का ॥
एकः पदातिः पुरुषो धनुष्मा-
न्योऽनेकमायानि वियद्गतानि ।
रक्षःसहस्राणि चतुर्दशाऽऽर्दी-
त्का तत्र वो मानुषमात्रशङ्का ॥
न्योऽनेकमायानि वियद्गतानि ।
रक्षःसहस्राणि चतुर्दशाऽऽर्दी-
त्का तत्र वो मानुषमात्रशङ्का ॥
Karandikar
What (sort of) wrong impression of yours is (that) he is mere human being, who, a single man, fighting on foot and bearing a bow, killed fourteen thousand demons who used many magic jugglaries and occupied the sky ?
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | कः | प | दा | तिः | पु | रु | षो | ध | नु | ष्मा |
| न्यो | ऽने | क | मा | या | नि | वि | य | द्ग | ता | नि |
| र | क्षः | स | ह | स्रा | णि | च | तु | र्द | शा | ऽऽर्दी |
| त्का | त | त्र | वो | मा | नु | ष | मा | त्र | श | ङ्का |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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