जगन्त्यमेयाऽद्भुतभावभाञ्जि
जिताऽभिमानाश्च जना विचित्राः ।
कार्ये तु यत्नं कुरुत प्रकृष्टं
मा नीतिगर्भान्सुधियोऽवमन्ध्वम् ॥
जगन्त्यमेयाऽद्भुतभावभाञ्जि
जिताऽभिमानाश्च जना विचित्राः ।
कार्ये तु यत्नं कुरुत प्रकृष्टं
मा नीतिगर्भान्सुधियोऽवमन्ध्वम् ॥
जिताऽभिमानाश्च जना विचित्राः ।
कार्ये तु यत्नं कुरुत प्रकृष्टं
मा नीतिगर्भान्सुधियोऽवमन्ध्वम् ॥
Karandikar
The worlds contain diverse temperaments and various types of people who have vanquished ego. You may undertake the utmost effort in (your) task; but do not disregard those of good intellect who are saturated with political strategy.
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | ग | न्त्य | मे | या | ऽद्भु | त | भा | व | भा | ञ्जि |
| जि | ता | ऽभि | मा | ना | श्च | ज | ना | वि | चि | त्राः |
| का | र्ये | तु | य | त्नं | कु | रु | त | प्र | कृ | ष्टं |
| मा | नी | ति | ग | र्भा | न्सु | धि | यो | ऽव | म | न्ध्वम् |
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